30+ नीम का पेड़ की विशेषताएं

नीम का पेड़ की जानकारी 

नीम के पेड़ हमारे आस पास के वातावरण को स्वच्छ रखे में बहुत मददगार होते है। नीम का पेड़ भारतीय बकाइन के नाम से जाना जाता है। हलाकि बकाइन एक अलग प्रजाति है, लेकिन कुछ जगहों पर नीम को भी बकाइन के नाम से ही पुरकारते है। नीम मेलिएसए (Meliaceae) कुल की प्रजाति का पेड़ है। जो की प्लांटाए जगत से सम्बन्ध रखता है। इसके अलावा इसका वंश “Azadirachta” माना जाता है। इसका अंग्रेजी नाम Azadirachta Indica है।

नीम का पेड़ गुलमोहर के पेड़ की तरह तेजी से वृद्धि करने वाला पेड़ है। इसकी सामान्य ऊंचाई लगभग 18 से 20 मीटर तक होती है। लेकिन यह प्रत्येक प्रदेश की जलवायु पर निर्भर करती है, कुछ हिस्सों में नीम के पेड़ की ऊंचाई 25 से 30 मीटर तक भी जाती है।

यह भारत के सभी हिस्सों में बहुत आसानी से देखने के मिल जाते है। भारत में यह प्राकृतिक रूप से भी उगते है। यह पेड़ सड़को के किनारे और बाग़ बगीचों मे भी उगाये जाते है। नीम के पेड़ का आयुर्वेद में हमेशा से एक इतिहास रहा है।

नीम का पेड़ एक लम्बे समय तक जीवित रहने वाला पेड़ है। इसका जीवनकाल लगभग 150 से 200 माना जाता है। लेकिन यह बात अभी तक कही पर भी स्पष्ट नहीं है। यह सिर्फ एक अनुमान है। नीम का पेड़ सबसे ज्यादा भारत, थाईलैंड, श्रीलंका, पाकिस्तान, नेपाल, इंडोनेशिया, और म्यानमार साहिक और अन्य देशो में भी पाया जाता है।

नीम की पत्तियों का स्वाद बहुत कड़वा होता है, इनका रंग हरा होता है, और इनकी सतह चिकनी होती है। इन पत्तियों के किनारे नुकीले होते है। नीम के फूल की बात की जाए तो, यह सफ़ेद रंग के गुच्छो में खिलते है, जो की दिखने में बहुत शानदार और आकर्षक होते है। इन फूलो पर पांच पंखुड़ियां होती है।

जब यह फूल कली के रूप में होते है, तो यह ऊपर से पूरी तरह बंद होते है। यह फूल खिलने के बाद पूरी तरह से नजर आते है। इन फूलो को भारत के कुछ हिस्सों में भोजन के रूप में भी खाया जाता है, जो की खाने में बहुत कड़वे होते है। लेकिन यह स्वस्थ के लिए बहुत लाभदायक है।

नीम के फल को निम्बोली के नाम से जाना जाता है। यह फल बहुत तेजी से फूलो से फल में बदलते है। इन फलो का रंग हल्का हरा होता है। इनके अंदर एक मोटा बीज होता है। अगर नीम के फूल को मसला जाए, तो इसके अंदर से एक चिपचिपा पदार्थ निकलता है, जिमसे से कड़वी गंध आती है। यह बीज गुच्छो मे लगते है। इन बीजो का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में भी किया जाता है।

नीम के पेड़ के फायदे

नीम का पेड़ हमारे जीवन में बहुत उपयोगी है। प्राचीन काल से ही यह आयुर्वेद में अपना महत्त्व बनाये हुए है। यह मधुमेह की बीमारी के लिए बहुत फायदेमंद होता है। इसके अलावा यह हमारे शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में बहुत फायदेमंद होता है।

अगर आप इसका एक नियम और किसी आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह से इस्तेमाल करते है, तो आपको इसके अध्भुत फायदे देखने को मिलते है। नीम के पेड़ के कई हिस्से फायदेमंद होते है, तो हम इस लेख में नीम की पत्तियों के फायदे, नीम के जूस के फायदे, और नीम के तेल के फायदे आदि से जुड़ी सभी जानकारी आपको प्रदान करायेंगे।

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नीम के बीजों (फल) का उपयोग 

नीम के बीजो का उपयोग चाय बनाने के लिए किया जाता है। इसके बीजो से बनी चाय सेहत के लिए बहुत लाभदायक होती है। यह शरीर में किडनी से सम्बंधित बिमारियों को दूर करती है। लेकिन बहुत से लोग इस चाय को पी नहीं पाते क्योकिं यह बहुत ज्यादा कड़वी होती है।

नीम के बीजो में कई पोषक तत्वों के अलावा एंटी पैरासिटिक, एंटी फंगल, और एंटी बैक्टीरियल, जैसे कई गुण पाए जाते है। इसके अलावा इसमें कई तरह के विटामिन सी और कैरोटीन और प्रोटीन भी शामिल होते है। अगर इसके बीजो का इस्तेमाल हम अपने बालो पर करते है, तो इससे हमारे बालों में हेयरफॉल और डैंड्रफ जैसी सभी समस्यांए दूर हो जाती है।

नीम के बीजो को पीसकर इन्हे जलने से मच्‍छर भागते है। अगर आप नीम के बीजो के तेल को पानी में मिलकर छिड़काब करते है, तो इससे मच्‍छर अंडे नहीं देते है। यह आपको मलेरिया जैसी बिमारियों से दूर रखने में सहायक है।

नीम के तेल का इस्तेमाल चेहरे पर करने से चेहरे की उम्र के कारण होने वाली झुर्रियां कम हो जाती है। क्योकिं इसके बीजो के तेल में मौजूद एंटी-ऑक्‍सीडेंट गुण पाए जाते है, जो हमारी त्चा के लिए फायदेमंद होते है।

नीम का इस्तेमाल पुराने समय से दांतो को साफ़ करने के लिए होता चला आ रहा है। इसके अंदर प्राकृतिक रूप से एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-सेप्टिक गुण मौजूद होते है। जो हमारे दांतो को साफ़ और स्वस्थ रखने में बहुत फायदेमंद होते है। अगर आप अपने मसूड़ों पर निम्बोली का तेल लगते है, तो यह आपके दांतो की सूजन और दर्द में तुरंत आराम पहुँचता है, इसके अलावा आपके मुँह की दुर्गन्ध को भी दूर करता है।

नीम की पत्तियों के फायदे 

अगर आप नीम की पत्तियों को रोज सुबह चार से पांच कोपल पानी से धोकर उन्हें चबाते है। तो इससे आपको डायबिटीज जैसी बिमारियों का खतरा नहीं रहता है। क्योकिं इन पत्तियों में एंटी-डायबेटिक गुण पाए जाते है।

अक्सर कुछ लोगो को पानी की वजह से उनके चेहरे पर पिम्पल हो जाते है। और यह अपने दाग चेहरे की त्वचा पर छोड़ देते है। जिससे की लोगो को बहुत परेशानी होती है। इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए आप रोज सुबह नीम की मुलायम पत्तियों को चबाकर खा सकते है।

अगर आप डिप्रेशन में रहते है, तो भी आप नीम की पत्तियों को खा सकते है। इससे आपके शरीर में इसके एंटी-डिप्रेसेंट गुण आपके शरीर में जाकर डिप्रेशन को कम करते है।

नीम का इस्तेमाल सबसे ज्यादा मुँह से सम्बंधित समस्याओं के लिए किया जाता है। अगर आप नीम की पत्तियों को खाते है, तो इससे आपके दांतो पर होने वाला पायरिया ख़त्म हो जाता है। इसके अंदर एंटीपायरेटिक गुण समृद्ध मात्रा में पाए जाते है। इससे आपके दन्त सफ़ेद और चमकदार रहते है।

नीम की पत्तियों का नियमित सेवन करने से आपके पेट में कब्ज जैसी समस्यायों से राहत मिलती है। इन पत्तियों में मौजूद फाइबर आपके खाने को पचाने में बहुत फायदेमंद होता है। गैस से सम्बंधित बिमारियों में भी राहत मिलती है।

नीम के तेल के फायदे 

नीम का तेल हमारे शरीर के लिए बहुत फायदेमंद होता है। अगर आपके शरीर पर कही भी किसी तरह का फंगल इंफेक्शन हो जाता है, तो आप इस पर नीम का तेल लगा सकते है। यह आपके अंग्रेजी दवाइयों से बेहतर फायदा पहुँचता है।

अगर आप अपने बालो की समस्यायों से परेशान है, तो आप अपने बालों पर नीम के तेल का इस्तेमाल कर सकते है। यह आपके बालो को घाना और स्वस्थ बनता है।

अगर आपके घर में या बगीचे में मच्छर ज्यादा हो रहे है। और यह आपके बगीचे में मौजूद पोधो को नुक्सान पंहुचा रहे है, तो आप अपने घर और बगीचे में नीम के तेल का स्प्रे कर सकते है। इससे मच्छर आपके घर से दूर रहेंगे।

हमारे घर में लगे पौधे अचानक से मुरझाने लगते है। और धीरे धीरे यह सूखने भी लगते है। इसका कारण होता है मच्छर, यह हमारे पौधे के पत्तो को ख़राब करना शुरू कर देते है। इन सब समस्याओं से बचने के लिए आपको अपने पोधो पर नीम के तेल का स्प्रे करना है। इससे पौधे हमेशा स्वस्थ रहते है।

जब भी आपके शरीर पोर कोई छोटा घाव हो जाता है, तो आप इसको जल्दी ठीक करने के लिए नीम के तेल का इस्तेमाल कर सकते है। यह बहुत जल्दी घाव को ठीक करता है।

नीम के तेल में विटामिन ई और फैटी एसिड समृद्ध मात्रा में होता है। अगर आपकी स्किन सुखी और बेजान है, तो आप कभी कभी अपने हाथो पर नीम के तेल का इस्तेमाल कर सकते है।

नीम को इस्तेमाल करने के नुक्सान 

  1. नीम के किसी भी आयुर्वेदिक फायदे को अपनाने से पहले, किसी आयुर्वेदक डॉक्टर से सलाह जरूर ले। आप खुद से कुछ भी नीम का कोई आयुर्वेदिक घरेलु इस्तेमाल ना करे, यह नुकसानदायक हो सकता है।

  2. नीम के का रस प्रतिदिन नहीं पीना चाहिए। यह स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।

  3. अगर आपकी त्वचा सेंसेटिव है, तो नीम का तेल आपकी त्वचा के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

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नीम का पेड़ कैसे उगाएं

नीम का पेड़ बीजों द्वारा कैसे उगाया जाता है? नीम के पेड़ को बीजो के द्वारा उगाना बहुत ही आसान होता है। सबसे पहले आपको नीम के बीजो को इकठ्ठा करना है। नीम के बीज आपको जून से लेकर अगस्त के महीने में पेड़ो के निचे मिल जाते है। आपको इसके पड़े हुए बीजो को उठा लेना है।

नीम के बीजो को उगाने के लिए आपको एक ट्रे लेनी है। आप इसके लिए मिटटी की ट्रे भी ले सकते है। यह ज्यादा गहरी नहीं होनी चाहिए। इसकी गहराई लगभग तीन से चार इंच बहुत होती है। इस ट्रे में आपको एक बात का ध्यान रखना है, की इसके निचे छेद होना बहुत जरुरी है। इससे पौधे से फालतू पानी बहार निकल जाता है। इस प्रकार की ट्रे लेने के बाद आपको इसके अंदर एक उपजाऊ मिटटी को तैयार करके भरना है।

मिटटी को तैयार करने के लिए आपको तीन हिस्से बगीचे की सामान्य मिटटी और एक हिस्सा पुराना गोबर का खाद। इसको अच्छे से मिलकर अपनी ट्रे में भर ले। मिटटी को भरने के बाद आपको सभी नीम के बीजो को लगभग कुछ कुछ दुरी पर एक इंच की गहराई में दबा देना है।

इसके बाद आपको अपनी ट्रे के ऊपर पानी का भरपूर मात्रा में छिड़काब करना है। पानी का छिड़काब करने के बाद इस गमले को एक ऐसी जगह पर रख देना है। जहाँ पर छाया आती हो। जब तक गमले में पौधे पूरी तरह से उग नहीं जाते तब तक आप इस गमले को सीधे धुप वाली जगह में ना रखे। आपके गमले से लगभग दो सफ्ताह में बीजो से पौधे उगना शुरू कर देते है।

जब आपके नीम के पौधे लगभग सात से आठ इंच के हो जाए, तो आप इन्हे किसी बड़े गमले में लगा दीजिये। जिससे की यह और भी ज्यादा अच्छे बढ़वार कर सके है। इस तरह से आप नीम के पेड़ को बीजो से लगा सकते है।

नीम के पेड़ की कलम कैसे लगायें 

नीम के पौधे को कटिंग द्वारा उगाने के लिए आपको सबसे पहले एक नीम की एक कलम लेनी है। इसके लिए आपको नीम के पेड़ पर जाकर एक ऐसी शाखा का चुनाव करना है, जो की नई हो। इस तरह की नीम की शाखा को लेकर आपको उसे निचे से के शार्प कट लगाना है। कलम को निचे से काटने के बाद आपको इसके ऊपर की सभी पत्तियों को भी काट देना है। और कलम को पांच मिनट के लिए पानी मैं रख देना है।

अब आपको एक छोटा सा गमला या फिर आप एक प्लास्टिक का गिलास भी ले सकते है। जिसके निचे छेद करना बहुत जरुरी है। इसको लेने के बाद इसमें एक उपजाऊ मिटटी डालनी है। जिस तरह की हमने पौधे को बीजो द्वारा लगाने के लिए बनाई थी। मिटटी को तैयार करने के बाद आपको इस गिलास मैं मिटटी को भर देना है।

मिटटी को गिलास में भरने के बाद आपको कटिंग के निचले सिरे पर रूटिंग हॉर्मोन पाउडर लगाना है। इससे आपकी कलम में जड़े बहुत तेजी से आती है। अगर आपके पास रूटिंग हार्मोन पाउडर नहीं है। तो आप उसको ऐसे भी लगा सकते है। इससे कलम में जड़े आने में समय लगता है। कलम को लगाने के बाद आपको इसके अंदर पानी देना है।

कलम को लगाने के बाद इस छोटे गमले या जिसमे भी आपने पौधा लगाया है। उसको किसी छायादार जगह पर रख दे। और इसके अंदर तब तक नमी बनाये रखे जब तक इसके अंदर जड़े नहीं आ जाती। पौधे को पानी देते समय एक बात का विशेष ध्यान रखे की यह हिल ना पाये। अगर आपकी कलम हिल जाती है। तो यह ख़राब हो सकती है।

इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए अगर आप नीम के पौधे को कलम द्वारा उगाते है, तो एक महीने में कलम द्वारा आपका पौधा तैयार हो जाता है।

नीम के पेड़ की बोन्साई कैसे बनाये 

नीम के पेड़ की बोन्साई देखने में बहुत खूबसूरत लगती है। लेकिन इसको बनाने में बहुत मेहनत और समय देना पड़ता है। अगर आप नीम के पेड़ से एक अच्छा बोन्साई बनाना चाहते है, तो इसमें आपको लगभग दो साल का समय लग सकता है। अब जानते है, की आपको नीम के पेड़ की बोन्साई कैसे बनाई है।

Step 1. सबसे पहले आपको एक नीम का पेड़ किसी गमले में तैयार करना है। जब आपका पेड़ लगभग दो फुट का हो जाए, तो आपको एक एलुमिनियम का तार लेना है। तार को लेकर आप उस पौधे की जड़ में गाढ़ दे। अब इस तर को धीरे धीरे से पौधे पर लपेटना शुरू करें।

Step 2. पौधे पर तार लपेटने के बाद आपको इसे अपने मनचाहे अनुसार आकर देना है। आकर देने के बाद इसको ऐसे ही कुछ दिनों के लिए छोड़ दे। जब तक यह तार पौधे के अंदर बैठने ना लग जाए।

Step 3. इस प्रक्रियां में लगभग एक से दो महीने लग सकते है। तब तक आपको अपने पौधे की सभी ऐसी शाखाओं को काट देना है, जो सीधी ऊपर की और बढ़ रही हो। आप इस पौधे को ऊपर की और नहीं बढ़ाना है, बल्कि एक बड़े पेड़ की तरह चारो और फैलाना है।

Step 4. कुछ दिन बाद जब आपको लगने लगता है, की आपका तार पौधे में पूरी तरह से बैठ गया है, तो आपको तार खोल लेना है। और उन शाखाओं पर बांधना है, जो सीधी जा रही है। शाखाओ पर तार बांधकर उन्हें अपने मनचाहे आकर में बदल दे।

Step 5. इसी तरह से आपको सभी शाखाओं को पौधे के तने के चारो और फैलाना है। जब आपका पौधा बोन्साई का रूप लेने लग जाए। तो आपको इस पौधे को एक कम गहराई वाले चौड़े गमले में लगाना है। अगर यह एक गहरे गमले में लगा है तो।

इस तरह से आप एक शानदार नीम का बोन्साई बना सकते है।

नीम के पौधे की देखभाल कैसे करें

नीम के पौधे की देखभाल करना सबसे आसान होता है। क्योकिं यह एक ऐसा पौधा है, जिस पर किसी भी प्रकार के किट पतंगे नहीं आते है।

जिस पौधे के पास यह होता है, साथ में उस पौधे को भी बहुत फायदा मिलता है। आपको नीम के पौधे की सबसे ज्यादा देखभाल पानी से करनी है। इस पौधे को पानी की ज्यादा आवश्यकता नहीं होती है।

पौधे को हमेशा उतना ही पानी दे, जितनी इसको आवश्यकता हो। अगर कभी आपने नीम के पौधे में ज्यादा पानी डाल दिया है। तो आप इसकी गुड़ाई करके छोड़ दे। इससे पौधे का पानी बहुत जल्दी सुख जाता है।

आपको इस पौधे को महीने में एक बार गोबर का खाद देना चाहिए। इससे यह बहुत जल्दी बढ़वार करता है। इसके अलावा आप एक महीने में नीम के पेड़ पर स्प्रे भी कर सकते है। इसके लिए आपको एक लीटर पानी में आधा चम्मच NPK खाद को अच्छी तरह से घोलकर इसका स्प्रे करें। इससे भी आपका पौधा बहुत स्वस्थ रहता है।

नीम के पेड़ को अच्छा और हरा भरा रखने के लिए आपको इन्ही कुछ बातो का ध्यान रखना है। इससे आपका पेड़ हमेशा हरा भरा रहेगा।

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