हमने प्रशिक्षण और सेवा के दौरान IAS Officer के जीवन

IAS उम्मीदवार से IAS अधिकारी बनने का सफर

एक छात्र का जीवन, जो कॉलेज के दिनों या नौकरी के दिनों में सभी प्रकार की मस्ती से भरा था वह एकदम से थम सा जाता है। उम्मीदवार जल्द ही खुद को अनगिनत किताबों और पुस्तकों में डूबा लेता है। उसने कभी भी इतना गहन और लगन के साथ पढ़ाई नहीं की थी लेकिन तैयारी की यह अवधि बहुत लंबी होती है। लंबे समय तक अनुशासित होकर पढ़ाई करने में लोगों को काफी मुश्किल होती है। अलग– अलग विषयों  को पढ़ने का उत्साह और जिज्ञासा धीरे– धीरे खत्म हो जाता है। सिविल सेवक बनने की धुन खत्म होने लगती है और नकारात्मक विचारों में बदलने लगती है। इस प्रकार की अनिश्चित सोच को संभालना और अपने सपने को बनाए रखने की दृढ़ता उम्मीदवार को सफल बनाती है।

भारत के अधिकांश छात्रों में पढ़ाई के दौरान कभी– न– कभी सिविल सेवा परीक्षा पास करने की इच्छा जरूर होती है। इन इच्छाओं को आमतौर पर कॉलेज के दिनों में या तो उनके माता– पिता पोषित करते हैं या किसी सफल उम्मीदवार या अपने सहयोगियों से उन्हें प्रेरणा मिलती है। इसके अलावा ज्यादातर औसत भारतीय करिअर की बेहतर संभावनाओं, स्थायी नौकरी, उच्च सामाजिक मूल्य औऱ समकालीन समय में सत्ता की भावना के कारण आईएएस उम्मीदवार बन भी जाते हैं। यह लेख ऐसे ही उम्मीदवार की कहानी बताता है जो इतना भाग्यशाली रहा कि अपने आईएएस उम्मीदवार के टैग को आईएएस अधिकारी से बदल के दिखा दिया।

भारत भर में ऐसे छात्रों की काफी संख्या है जो बिना किसी व्यावसायिक कोचिंग संस्थान की मदद के खुद के बूते सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करते हैं। हालांकि, ज्यादातर आईएएस उम्मीदवार दिल्ली में पुराना राजेन्द्र नगर या मुखर्जी नगर के आस–पास स्थित किसी कोचिंग संस्था में नजर आते है। साथ ही ये संस्थान जीएस, वैकल्पिक विषयों, टेस्ट सीरिज, निबंध और अन्य विषयों के लिए काफी फीस भी लेते हैं।

आईएएस की तैयारी के दौरान जीवन

कई उम्मीदवार अपने कॉलेज के समय से ही तैयारी करना शुरु कर देते हैं, आमतौर पर छात्र जिस परीक्षा में शामिल होने की योजना बना रहे होते हैं उसकी प्राथमिक परीक्षा से करीब एक वर्ष पहले से ही अनुशासित एवं सतत पढ़ाई शुरु कर देते हैं। प्री टेस्ट के लिए यह उल्टी गिनती का समय होता है जो किसी की भी तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण, अहम और चुनौती भरा चरण होता है।

एक छात्र का जीवन, जो कॉलेज के दिनों या नौकरी के दिनों में सभी प्रकार की मस्ती से भरा था वह एकदम से थम सा जाता है। उम्मीदवार जल्द ही खुद को अनगिनत किताबों और पुस्तकों में डूबा लेता है। उसने कभी भी इतना गहन और लगन के साथ पढ़ाई नहीं की होती है। लंबे समय तक अनुशासित होकर पढ़ाई करने में लोगों को काफी मुश्किल होती है। सिविल सेवक बनने की धुन खत्म होने लगती है और नकारात्मक विचारों में बदलने लगती है। इस प्रकार की अनिश्चित सोच को संभालना और अपने सपने को बनाए रखने की दृढ़ता उम्मीदवार को सफल बनाती है।

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