ब्रह्म कमल फूल की जानकारी

ब्रह्म कमल की जानकारी Brahma Kamal in Hindi

ब्रह्म कमल एक प्रकार का फूल होता है, जिसका वानस्पतिक नाम : Saussurea Obvallata है। इसकी 24 प्रजातियां उत्तराखंड राज्य में मिलती है, इसे उत्तराखंड में कौल पद्म नाम से भी जाना जाता है, कुछ किवदंतियों के अनुसार ऐसा भी माना जाता है, की इस फूल का नाम सृष्टि के देवता ब्रह्मा के नाम पर पड़ा है।

इसके अलावा ब्रह्म कमल की पुरे संसार में लगभग 210 प्रजातियां पाई जाती है। यह फूल पुरे साल में सिर्फ एक बार रात के समय खिलता है। कभी कभी यह खिलने में एक साल से ज्यादा का समय भी लगा देता है। कुछ लोगो का एक सवाल होता है, की ब्रह्म कमल कब खिलता है? आपको बता दें की ब्रह्म कमल साल में एक बार रात के समय जुलाई और सितंबर के बीच में खिलता है।

 

ब्रह्म कमल का उपयोग आयुर्वेद में एक जड़ी बूटी के रूप में किया जाता है। इसका जड़ से लेकर फूल तक सभी अंगो को उपयोग में लाया जाता है। ब्रह्म कमल किस राज्य का राजकीय पुष्प है, आपको बता दे की ब्रह्म कमल का फूल उत्तराखंड राज्य का राजकीय पुष्प है। भारत में यह फूल बहुत पवित्र माना जाता है। हिन्दू धर्म में इस फूल को सुख समृद्धि और धन का प्रतिक माना जाता है। जिस घर में ब्रह्म कमल का पौधा लगाया जाता है, वजहें पर हमेशा सुख शांति बनी रहती है।

ब्रह्म कमल का रंग सफ़ेद होता है, यह सुन्दर और आकर्षक फूल चन्द्रमा की रौशनी में खिलता है। सूर्यास्त के बाद यह खिलना शुरू होता है। ब्रह्म कमल के फूल को पूरा खिलने में लगभग दो से तीन घंटे का समय लगता है। और यह पूरी रात खिला रहता है। ब्रह्म कमल के फूल के लिए ऐसा भी माना जाता है, की अगर ब्रह्म कमल के फूल को खिलते हुए देख कर कोई भी मनोकामना मांगी जाए, तो वह पूरी हो जाती है।

ब्रह्म कमल का पौधा कहां मिलता है? ब्रह्म कमल के पौधे सबसे ज्यादा उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्रों में उगते है। जिनमे पिंडारी ग्लेशियर, फूलों की घाटी, हेमकुंड साहिब, और तुंगनाथ प्रमुख है। केदारनाथ में ब्रह्म कमल के फूल को चढ़ाया जाता है।

इस फूल का जब खिलने का मौसम आता है, तो स्थानीय लोग ब्रह्म कमल को तोड़कर मंदिरो तक पहुंचाते है। इस फूल की बिक्री पर प्रतिबन्ध होने के बाबजूद भी इसे तीर्थयात्रियों को बेचा जाता है। वतमान में ब्रह्मकमल ख़त्म होने की कगार पर है, क्योकिं जैसे ही इसके फूल खिलते है, तुरंत तोड़ लिए जाते है। जिससे की फूलों से बीज नहीं बन पाते है। इस प्रकार इसकी प्रजातियां ख़त्म होने की कगार पर है।

Braham Kamal Information in HIndi

ब्रह्म कमल को तोड़ने के नियम

ब्रह्म कमल माँ नंदा देवी को सबसे प्रिय पुष्प है। इसलिए ब्रह्म पुष्प को नंदा अष्टमी के दिन तोड़ा जाता है। इसके अलावा ब्रह्म कमल को तोड़ने के और भी कई सख्त नियम होते है, जिनका पालन करना बहुत जरुरी है। इस फूल का जीवनकाल लगभग 5 से 6 महीने होता है। इस फूल का उल्लेख भारतीय महाकाव्य महाभारत में भी मिलता है। इसकी मादक सुगंध की वजह से द्रोपदी इस पुष्प को पाने के लिए व्याकुल हो गयी थी।

ब्रह्म कमल की अपनी एक कहानी भी है। जिसके अनुसार ऐसा माना जाता है, की जब हिमालय क्षेत्र में आए थे, तो उन्होंने भगवान् शिव को एक हजार ब्रह्मकमल चढ़ाये थे, लेकिन इसमें से एक पुष्प कम था। तब विष्णु भगवान ने पुष्प के रुप भगवान् शिव को अपनी एक आँख समर्पित की थी। उस समय से भगवान् शिव को कमलेश्वर के नाम से और विष्णु भगवान को नाम कमल नयन के नाम से जाना जाता है।