इन कर्मचारियों को नहीं मिलेगा पुरानी पेंशन योजना का लाभ, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

पुरानी पैंशन प्रणाली को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से बड़ा फैसला सुनाया गया है। जिसके चलते है इन कर्मचारियों को एनपीएस के दायरे से बाहर रखा गया है। आइए जानते है ओल्ड पेंशन स्कीम को लेकर क्या है अपडेट

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह कार्मिक, पेंशन और लोक शिकायत मंत्रालय के पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा जारी तीन मार्च, 2023 के आफिस मेमोरेंडम (कार्यालय प्रपत्र) का पालन करेगी। इस आफिस मैमोरेंडम में कुछ शर्तों के साथ कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना अपनाने का 31 अगस्त, 2023 तक वन टाइम विकल्प दिया गया है।

सशस्त्र बलों में थलसेना, नौसेना और वायुसेना

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही केंद्र सरकार की याचिका पर प्रतिवादी पवन कुमार एवं अन्य को नोटिस भी जारी किया है और फरवरी, 2024 तक जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में फरवरी, 2024 में सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी है कि हाई कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों को सशस्त्र बलों के समान माना है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि सर्कुलर में प्रयुक्त किए गए शब्द सशस्त्र बलों में सिर्फ थलसेना, नौसेना और वायुसेना आते हैं, उनमें अर्धसैनिक बल नहीं आते

डिजिटल डेस्क नई दिल्ली, सुप्रीम कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया है कि वह कार्मिक, पेंशन और लोक शिकायत मंत्रालय के पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग द्वारा जारी तीन मार्च, 2023 के आफिस मेमोरेंडम (कार्यालय प्रपत्र) का पालन करेगी। इस आफिस मैमोरेंडम में कुछ शर्तों के साथ कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना अपनाने का 31 अगस्त, 2023 तक वन टाइम विकल्प दिया गया है।

सशस्त्र बलों में थलसेना, नौसेना और वायुसेना

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही केंद्र सरकार की याचिका पर प्रतिवादी पवन कुमार एवं अन्य को नोटिस भी जारी किया है और फरवरी, 2024 तक जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में फरवरी, 2024 में सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी है कि हाई कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों को सशस्त्र बलों के समान माना है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि सर्कुलर में प्रयुक्त किए गए शब्द सशस्त्र बलों में सिर्फ थलसेना, नौसेना और वायुसेना आते हैं, उनमें अर्धसैनिक बल नहीं आते।

सशस्त्र बलों में थलसेना, नौसेना और वायुसेना

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही केंद्र सरकार की याचिका पर प्रतिवादी पवन कुमार एवं अन्य को नोटिस भी जारी किया है और फरवरी, 2024 तक जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में फरवरी, 2024 में सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी है कि हाई कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों को सशस्त्र बलों के समान माना है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि सर्कुलर में प्रयुक्त किए गए शब्द सशस्त्र बलों में सिर्फ थलसेना, नौसेना और वायुसेना आते हैं, उनमें अर्धसैनिक बल नहीं आते।

सशस्त्र बलों में थलसेना, नौसेना और वायुसेना

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही केंद्र सरकार की याचिका पर प्रतिवादी पवन कुमार एवं अन्य को नोटिस भी जारी किया है और फरवरी, 2024 तक जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में फरवरी, 2024 में सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी है कि हाई कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों को सशस्त्र बलों के समान माना है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि सर्कुलर में प्रयुक्त किए गए शब्द सशस्त्र बलों में सिर्फ थलसेना, नौसेना और वायुसेना आते हैं, उनमें अर्धसैनिक बल नहीं आते।

सशस्त्र बलों में थलसेना, नौसेना और वायुसेना

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही केंद्र सरकार की याचिका पर प्रतिवादी पवन कुमार एवं अन्य को नोटिस भी जारी किया है और फरवरी, 2024 तक जवाब तलब किया है। सुप्रीम कोर्ट अब इस मामले में फरवरी, 2024 में सुनवाई करेगा। केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को इस आधार पर चुनौती दी है कि हाई कोर्ट ने अर्धसैनिक बलों को सशस्त्र बलों के समान माना है, जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि सर्कुलर में प्रयुक्त किए गए शब्द सशस्त्र बलों में सिर्फ थलसेना, नौसेना और वायुसेना आते हैं, उनमें अर्धसैनिक बल नहीं आते।

एनपीएस के दायरे से सशस्त्र बल बाहर

केंद्र सरकार ने एनपीएस लागू करने की जो अधिसचूना जारी की थी, उसमें एनपीएस के दायरे से सशस्त्र बलों को बाहर रखा था। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को जिस तीन मार्च, 2023 के डीओपीटी के आफिस मेमोरेंडम का पालन करने का आदेश दिया है, वह आफिस मेमोरेंडम सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट के अर्धसैनिक बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने के 11 जनवरी, 2023 के फैसले के बाद जारी किया था। वह आफिस मेमोरेंडम कहता है कि जिन मामलों में केंद्र सरकार के सिविल कर्मचारियों ने नेशनल पेंशन स्कीम (एनपीएस) की 22 दिसंबर, 2003 की अधिसूचना निकलने से पहले विज्ञापित हुई रिक्तियों और भर्तियों में नौकरी पाई हैं और उनकी सर्विस की ज्वाइनिंग एनपीएस लागू होने की तिथि एक जनवरी, 2004 को या उसके बाद हुई है, उन्हें सीसीएस पेंशनल रूल, 1972 जो कि अब 2021 हैं, में पुरानी पेंशन अपनाने का वन टाइम का विकल्प दिया जाएगा। संबंधित सरकारी कर्मचारी इस विकल्प को

दिल्ली हाई कोर्ट ने 11 जनवरी, 2023 को दिए फैसले में अर्धसैनिक बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू करने का आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने एनपीएस लागू करने की अधिसचूना में प्रयुक्त शब्द सशस्त्र बलों में अर्धसैनिक बलों को भी शामिल माना था। केंद्र सरकार ने सशस्त्र बलों में अर्धसैनिक बलों को शामिल मानने और उन्हें थलसेना, नौसेना व वायुसेना के सामन मानकर पुरानी पेंशन योजना का लाभ देने के दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पांच जुलाई को जस्टिस संजीव खन्ना और जस्टिस बेला एम. त्रिवेदी की पीठ ने केंद्र की याचिका पर सुनवाई के बाद मामले में नोटिस जारी करते हुए हाई कोर्ट के आदेश के अर्धसैनिक बलों के लिए पुरानी पेंशन योजना लागू किए जाने के अंश पर रोक लगा दी। लेकिन डीओपीटी के तीन मार्च, 2023 के सर्कुलर का पालन करने का केंद्र सरकार को निर्देश दिया है।

अर्धसैनिक बलों को सशस्त्र बलों के समान मानना ठीक नहीं

केंद्र ने याचिका में कहा है कि हाई कोर्ट का अर्धसैनिक बलों को सशस्त्र बलों के समान मानना ठीक नहीं है। हाई कोर्ट ने आदेश देते वक्त एनपीएस योजना के दायरे की अनदेखी की है जिसके मुताबिक एनपीएस योजना सशस्त्र बलों यानी थलसेना, नौसेना व वायुसेना को छोड़कर सभी सरकारी कर्मचारियों पर लागू है। हाई कोर्ट ने एनपीएस लागू करने के सर्कुलर को ठीक से नहीं समझा। केंद्र का कहना है कि थलसेना, नौसेना व वायुसेना को एनपीएस से बाहर रखने के पीछे कारण था कि उनके सर्विस और पेंशन रूल सिविल कर्मचारियों और अर्धसैनिक बलों से भिन्न हैं।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *