अशोक के पेड़ की जानकारी

अशोक का पेड़ की रोचक जानकारी

 

इस पेड़ का वानस्पतिक नाम सरका असोच है, यह ज्यादातर भारतीय उपमहाद्वीप में मध्य और पूर्वी हिमालय में पाया जाता है। अशोक के पेड़ का अपना अलग अर्थ है, अगर हम सिर्फ शोक शब्द का अर्थ निकाले, तो इसका मतलब होता है शोक और अशोक का अर्थ होता है, सभी दुखो से रहत दिलाने वाला।

इस पेड़ को हिन्दू और बोद्धो में बहुत महत्त्व दिया जाता है, कुछ लोगो का यह भी माना है, की गौतम बुद्ध का जन्म अशोक के पेड़ के निचे ही हुआ था। अशोक का पेड़ को कुछ देशो में बहुत ही पवित्र माना जाता है, जिनमे भारत, श्रीलंका और नेपाल शामिल है।

अशोक के पेड़ की दो प्रजातियां होती है, जिसमे एक प्रजाति घरो में सजावट के लिए लगायी जाती है, और दूसरी प्रजाति के पोधो से आयुर्वेदि दवाइयां बनायीं जाती है। अशोक के जो पेड़ आप घरो के आस पास देखते है, यह सभी सजावटी पौधे की प्रजाति होती है।

अशोक के सजावटी पौधे की प्रजाति के पत्तो का रंग हरा होता है, जिस पर सफ़ेद रंग के सुन्दर फूल आते है। और इसकी दूसरी प्रजाति, जिसका इस्तेमाल आयुर्वेद में किया जाता है, उसके पत्तो का रंग हल्का ताम्र होता है, यह पत्ते लम्बे होते है। अशोक के पत्तो का रंग ताम्र होने के कारण, इसे पेड़ को ताम्रपल्लव नाम से भी जाना जाता है। इस पेड़ पर लाल और नारंगी रंग के फूल खिलते है।

अशोक के पेड़ को उड़ीसा राज्य का राज्य फूल है। यह फूल बसंत के मौसम में खिलते है, जिस समय यह फूल खिलते है, उस समय अशोक का पेड़ बहुत आकर्षक और सुन्दर नजर आता है। यह फूल गुच्छों में खिलते है। अशोक के पेड़ की सुंदरता के कारण इस पेड़ को हेमपुष्पा नाम से भी जाना जाता है।

रामायण काल में जब रावण ने सीता को हरण किया था, तो उसको अपनी अशोक वाटिका में ले जाकर रखा था। उस वाटिका का नाम अशोक इसलिए था, क्योकिं उसमे अधिक मात्रा में अशोक के पेड़ थे, और इसका दूर कारण यह भी था, अशोक का अर्थ होता है, राहत देने वाला। इन सभी बातो के अनुसार हिन्दू धर्म में अशोक के पेड़ को पवित्र माना गया है।

अशोक का पेड़ ज्यादातर बाग बगीचों में इसलिए लगाया जाता है, क्योकिं यह घाना और छायादार पेड़ होता है। इसका तना सीधा चलता है, जिसका रंग भूरा होता है। यह अपनी खास वृद्धि के अनुसार ही घरो और बगीचों में लगाया जाता है, जिससे की घरो की सुंदरता बढ़ जाती है, इस पेड़ की पत्तियों का आकर नुकीला होता हैं, जो की पेड़ पर बहुत घनी होती हैं।

अशोक का पेड़ मध्य ऊंचाई वाले पोधो की सूचि में आता है, क्योकिं इस पेड़ की ऊंचाई लगभग 30 – 40 फिट तक जाती है। यह अपनी शाखाओ को ज्यादा नहीं फैलाता है। यह खासकर सीधा चलता है।

अशोक का पेड़ Information About Ashoka Tree in Hindi 

इस पेड़ को आयुर्वेद में अधिक महत्त्व दिया गया है, जिसके कारण इसे एक औषधीय पेड़ के रूप में भी जाना जाता है। इस पेड़ के सभी अंगो जैसे तना, फूल, फल, पत्ते, और छाल दवाइयाँ बनाने के काम में आती है। चरम रोगो की दवाइयां ज्यादातर अशोक के पेड़ का इस्तेमाल करके बनाई जाती है। अगर आपके शरीर के किसी हिस्से पर मुहासे हो जाते है, तो अशोक की चल को घिसकर लगाने से यह मुंहासों को ठीक करने में मदद करता है।

अशोक के पेड़ के फायदे

अशोक का पेड़ अपने औषधीय गुणों के लिए जाना जाता हैं, तो हम इसके कुछ आयुर्वेदिक गुणों के बारे में जानेगे। यह सभी फायदे आप किसी आयुर्वेदक वैद्य से पूछकर अपना सकते है। तो चलिए जानते अशोक के पेड़ के औषधीय गुणों के बारे में –

हड्डियों के लिए फायदेमंद अशोक का पेड़ 

अगर आपके कभी चोट लगने पर शरीर के किसी हिस्से की हड्डी टूट जाती है, और उसमे बहुत ज्यादा दर्द होता है, तो आप 5 – 7 ग्राम अशोक का चूर्ण लेकर, उसे दूध के साथ सुबह शाम सेवन करें। इससे आपकी टूटी हुई हड्डी का दर्द भी काम होगा, और वह जल्दी ही ठीक हो जाएगी।

यादाश्त को मजबूत करें अशोक का पेड़ 

जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती जाती है, हमारी यादाश्त कमजोर हो जाती है। लेकिन इसे बढ़ाया भी जा सकता है, इसको बढ़ाने के लिए आप अशोक की छाल और ब्राह्मी चूर्ण को एक जगह पर मिला ले, और एक चम्मच सुबह और एक चमच शाम को दूध के साथ लेने से यादाश्त बढ़ने लगती है। लेकिन इसका सेवन नियमित रूप से करना चाहिए और किसी आयुर्वेदिक वैद्य की देख रेख में।

शरीर के दर्द से दिलाये तुरंत राहत 

हमेशा ऐसा होता है, जिस दिन हम ज्यादा कार्य करते है, या फिर कही लम्बी यात्रा से आते है, तो हमारे पुरे शरीर में दर्द होता है। इस दर्द को दूर करने के लिए आप अशोक के पत्तो का काढ़ा बनाकर पी सकते है। इस काढ़े को सिर्फ 15 – 20 मिली मात्रा में ही पीना चाहिए। इसे पिने के बाद आपको तुरंत आराम मिलेगा।

दस्त में राहत दिलाये अशोक 

अशोक के पेड़ में समृद्ध मात्रा में एंटी डायरियल गुण पाए जाते है, जिसकी वजह से डायरिया और दस्त जैसी समस्याओं में यह फायदेमंद होता है।

सांस रोग में फायदेमंद अशोक 

हमेशा बढ़ती उम्र के कारण साँस फूलने जैसे समस्यां होने लगती है। अगर किसी व्यक्ति को साँस सम्बन्धी समस्यां हो जाती है, तो इससे छुटकारा पाने के लिए आप अशोक के बीजो का चूर्ण लगभग 60 मिली ग्राम और एक पान का बीड़ा लेकर, उस बीड़े में अशोक के चूरन को रखकर इसका सेवन करने से कुछ महीनो में ही यह समस्यां दूर हो जाती है।

त्वचा के लिए अशोक के पेड़ का महत्व 

अशोक के पेड़ में कई एंटीबायोटिक गुण पाए जाते है, इसके अलावा इसमें ऐसे भी कई पोषक तत्व है, जो हमारे शरीर की गंदगी को बहार निकलते है। जिससे हमारे शरीर की त्वचा साफ़ होने लगती है। यह हमारे शरीर के खून को शुद्ध करता है और एलर्जी जैसी समस्याओं को दूर करने में भी बहुत लाभदायक होता है। अशोक के पत्तो और फूलो को पीसकर उसे त्वचा की उस जगह पर लगाने से बहुत आराम मिलता है, जहाँ पर जलन हो रही हो।

अशोक का पेड़ कैसे लगाये How to Grow Ashoka Tree 

जिस तरह से दूसरे सभी पेड़ जैसे गुलमोहर आदि को लगाया जाता है, उसी तरह अशोक के पेड़ को लगाना भी बहुत आसान है। आपको अशोक के पेड़ को बहार नर्सरी से खरीदने की जरुरत नहीं पड़ेगी। आप अपने घर में ही बहुत आसानी से इसको ऊगा सकते है। लेकिन इस पेड़ को लगाने से पहले कुछ बातो का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। जिससे की अशोक पेड़ तेजी से बड़ा हो सके। इस पेड़ को दो तरीको से लगाया जाता है।

एक अशोक के पेड़ को कटिंग के द्वारा लगाया जाता है। और दूसरा तरीका अशोक के पेड़ को लगाने का है, बीजो के द्वारा लगाने का यहाँ पर आज हम दोनों तरीको को जानेगे। इसके साथ ही यह भी जानेगे की ऐसी क्या खाद देनी चाहिए जिससे अशोक का पेड़ घर में बहुत जल्दी बड़ा हो जाए। साथ ही जानेगे की इसकी देखभाल कैसे करनी है। तो चलिए सबसे पहले जानते है अशोक के पेड़ को कटिंग के द्वारा घर में कैसे लगाया जाता है।

अशोक के पेड़ को कलम से कैसे लगाएं

अशोक के पेड़ को कटिंग के द्वारा लगाने के लिए आपको बरसात के मौसम का इंतजार करना होता है वैसे तो आप किसी भी मौसम में लगा सकते है। लेकिन बरसात का मौसम सबसे अच्छा होता हो। इन दिनों आपको अपनी कटिंग की ज्यादा देखभाल करने की आवश्यकता नहीं होती है।

अशोक का पेड़ कटिंग से लगाने के लिए आपको सबसे पहले एक पुराने पेड़ की कटिंग लेनी है। कटिंग को लाने के बाद, आपको उसके लिए मिटटी तैयार करनी है। मिटटी में आप सामान्य बगीचे की मिटटी और उसमे गोबर की खाद और थोड़ा नीमखली मिला सकते है। अगर आपके पास नीमखली नहीं है, तो कोई बात नहीं आप ऐसे ही छोड़ सकते है।

इसके बाद आपको अपने गमले के ऊपर एक परत रेट की लगनी चाहिए। इससे जो है गमले में पानी नहीं रुकता रेट पानी को सोख लेता है। जिससे की कलम के ख़राब होने की आशंका नहीं होती है।

कलम को आपको हमेशा चार इंच या पांच इंच ही रखे। कलम लगाने से पहले उसके पत्तो को काट देना चाहिए। इसके बाद आपको इन सभी कलम को रूटिंग हार्मोन पाउडर का घोल बनाकर अपनी सभी कलम को उसमे लगभग पांच मिनट के लिए छोड़ दे। इससे आपकी कलम में जड़े जल्दी से आ जाएँगी। आप रूटिंग पाउडर किसी भी ऐसी दुकान से ला सकते है, जहाँ पर कृषि सम्बन्धी सामान मिलता है।

5 मिनट बाद अपनी अशोक की कलम को रूटिंग पाउडर के घोल से निकालकर उसको गमले में लगा दे। अगर आपके पास रूटिंग पाउडर नहीं है, तो आप अपनी कलम को चीनी के घोल में भी रख सकते है। यह भी कलम से जड़े निकलने में काम आता है। यह भी एक तरीके से रूटिंग पाउडर का ही कार्य करता है।

अशोक के पेड़ को बीज से कैसे लगाएं

अशोक के पेड़ को बीजो के द्वारा लगाने के लिए आपको सबसे पहले इसके बीजो को इकठा करता है। यह बीज अगस्त से सितम्बर महीनो के बिच में आते है। आपको अशोक के बीजो को इकठा करते समय एक बात का विशेष ध्यान रखना है की यह सभी बीज सही होने चाहिए। क्योकिं कुछ बीज पेड़ पर ही अंदर से ख़राब हो जाते है।

अशोक के बीजो को इकठा करने के बाद आपको एक गमला लेना है। अगर आपके पास गमला नहीं है, तो आपको कोई भी प्लास्टिक की बाल्टी ले सकते है। उसके निचे छेद होना जरुरी है। इसके बाद इस गमले में आपको रेतीली मिटटी या फिर रेट भर लेना है। क्योकिं यह सामान्य मिटटी में उगने में बहुत समय लगते है। क्योकिं सामान्य मिटटी रेतीली मिटटी के मुकाबले बहुत कठोर होती है।

गमले मिटटी भरने के बाद अशोक के बीजो को लगभग 3 – 4 इंच की गहराई में लगा दे। बीजो को गमले में लगाने के बाद मिटटी को ऊपर से बराबर कर दे। इसके बाद गमले में पानी भर दे। और इसको छाया वाली जगह में रख दे। और इसके अंदर नमी बनाये रखे, गमले को सूखने ना दे। बिच बिच में पानी डालते रहे।

इसके बाद आपको लगभग एक महीने तक इंतजार करना है, अगर आपकी मिटटी सही रही तो यह जल्दी भी उग सकते है। एक महीने बाद आपके अशोक के पेड़ उग जायेंगे। जब यह थोड़े बड़े हो जाएँ तो इन्हे दूसरे बड़े गमले या जमीन में लगा दीजिये।

दूसरे गमले में लगाने के लिए आपको 80% सामान्य मिटटी और 20% गोबर की पुरानी खाद या कॉकपिट डालकर मिला ले। मिटटी को तैयार करने के बाद आप दूसरे बड़े गमले में पौधे को लगा सकते है।

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